आजकल कोई किसी के लिए ख़ास नहीं होता,
ज़िंदगी में जो जिसके काम आता है,
वही अपना होता।
लोग उसे ही ये एहसास दिलाते हैं कि,"तू सिर्फ़ मेरा है",
जबकि साथ मतलब तक ही होता।
ज़िंदगी में हर कोई एक जैसा नहीं होता,
किसी को अपने मतलब के लिए रिश्ता निभाना आता है।
और कोई बिना किसी मतलब के,
अपनों पर सब कुछ लुटा जाता है।
आज की दुनिया में कोई अपना नहीं होता,
जब तक तुम किसी के काम आते हो,
तब तक ही रिश्ता अपना होता।
मतलब निकल जाए तो लोग बदल जाते हैं,
फिर जो अपना लगता था, वो भी बस एक सपना होता है।